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संक्षिप्त परिचय

युवकों का होता जहाँ निर्माण, आर्य वीर दल है उसका नाम

आर्य वीर दल के तीन मुख्य उद्देश्य

1- संस्कृति रक्षाः- वेद का ज्ञान सृष्टि के आरम्भ में समस्त प्राणियों के कल्याण हेतु ईश्वर ने मनुष्यों को दिया। इसीलिये हमारी संस्कृति वेदों पर आधारित है। यह वैदिक संस्कृति विश्व में सबसे प्राचीन है। इसी संस्कृति का अनुसरण करते हुये विभिन्न ट्टषि-मुनियों, मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम, योगीराज श्रीकृष्ण, ब्रह्मचारी हनुमान, नीतिज्ञ चाणक्य, गुरु गोविन्द सिंह, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, महर्षि दयानन्द सरस्वती आदि अनेक महापुरुषों ने जीवन की उत्कृष्टता को प्राप्त किया। ऐसी महान् संस्कृति का अनुसरण एवं संवर्द्धन करना इस दल का प्रथम उद्देश्य है।

2- शक्ति संचयः- शक्ति से अभिप्राय शारीरिक उन्नति करना है। शारीरिक उन्नति के लिये आहार, निद्रा, ब्रह्मचर्य, स्वाध्याय के स्तम्भों को सुदृढ़ बनाये रखना आवश्यक है। शारीरिक, आत्मिक एवं चारित्रिक रूप से बलवान् मनुष्य रत्न के समान चमकता हुआ चहुँ ओर अपनी अलग प्रतिष्ठा, सम्मान व पहचान बनाता है। पुरुषार्थी बनकर अपने शरीर एवं आत्मा को कर्म की भट्टी में जलाकर शारीरिक एवं आत्मिक उन्नति को प्राप्त करना तथा उपलब्ध साधनों द्वारा आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी व दूसरों की आपत्काल में सुरक्षा करना, इस दल का दूसरा उद्देश्य है।

3- सेवा कार्यः- सेवा मानव को मानव से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। सेवा करना तप समान है। सेवा करने वाले के हृदय में प्रेम, करुणा, उदारता, परोपकार और सहनशीलता का होना आवश्यक है।

उत्तम संस्कृति का अनुसरण अपने पूर्ण पुरुषार्थ द्वारा शारीरिक एवं चारित्रिक बल को अर्जित कर मानवमात्र की सेवा में लगा देना ही दल का तीसरा उद्देय है।

दल का ध्येय वाक्य

1- अस्माकं वीरा उत्तरा भवन्तुय् हमारे वीर विजयी हों।

2- इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्य अपघ्नन्तो अराव्णः|

आर्य वीर दल: ऐतिहासिक तथ्य

पंडित लेखराम, महाशय राजपाल, स्वामी श्रद्धानन्द आदि अनेक वैदिक विद्वानों व संन्यासियों की कुछ व्यक्तियों के मतान्धता में आकर निर्मम हत्या के उपरान्त, आर्य जगत् को आर्य नेताओं, वैदिक विद्वानों, सामाजिक उत्सवों, राष्ट्र व समाज की सुरक्षा हेतु एक विशेष समर्पित दल की आवश्यकता सर्वत्र महसूस हुई। 1927 में हुये प्रथम आर्य महासम्मेलन में महात्मा नारायण स्वामी एवं महात्मा हंसराज जी की अध्यक्षता में फ्आर्य रक्षा समितिय् का गठन किया गया। जिसके मन्त्री पद का कार्यभार पंडित इन्द्र विद्यावाचस्पति जी को दिया गया। समिति का कार्य था कि वह देश भर में भ्रमण कर 10 हजार ऐसे स्वयंसेवकों का चयन करे, जो धर्मरक्षा एवं राष्ट्ररक्षा के लिये प्राण तक अर्पण करने में सदा उद्यत हों और रक्षा निधि के लिये 50 हजार रुपये एकत्र करे। आर्यों के भारी उत्साह के फलस्वरूप बहुत कम समय में ही 12 हजार स्वयंसेवक व लक्षित धन एकत्र हो गया।

समिति ने स्वयंसेवकों के दल का नाम फ्आर्य वीर दलय् रखा और 26 जनवरी 1929 को सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा ने इसका संविधान बनाकर फ्आर्य वीर दलय् की विधिवत् स्थापना कर दी।

श्री पं. शिवचन्द्र जी इसके प्रथम संचालक नियुक्त किये गये। अल्पकाल में ही आर्य वीर दल ने पूरे भारत में प्रशंसनीय कार्य किये। जिसके फलस्वरूप आर्य नेताओं व विद्वानों पर होने वाले आक्रमणों पर अंकुश लगा व आर्यों की शोभायात्र, नगर कीर्तन और उत्सव निर्विघ्न सम्पन्न होने लगे

1931 में महात्मा नारायण स्वामी जी की अध्यक्षता में दूसरा आर्य महासम्मेलन का आयोजन बरेली में किया गया। जिसमें भारत के सभी आर्य समाजों से अपने यहाँ आर्य वीर दल की शाखाओं की स्थापना तथा संचालन की अनिवार्यता और आर्य वीर दल के कार्यों एवं इसके विस्तार में यथाशक्ति सहयोग, सहायता एवं प्रोत्साहन देने का निर्णय किया गया।

1936 में धुन के धनी, अदम्य साहसी व शूरवीर युवक श्री ओम्प्रकाश त्यागी जी आर्य वीर दल के संचालक नियुक्त हुये। इनका नेतृत्व पाकर दल का तीव्रता से विस्तार हुआ। 1946-47 में नौआखली में मतान्ध मुस्लिम अराजक तत्त्वों से आर्य वीरों ने हिन्दुओं की रक्षा की। 1947-48 में पाकिस्तानी सीमा को पार करके भारतीय सीमा के अन्दर भारतीय चौकी पर आक्रमण करने आये पाकिस्तानी सैनिकों व अंसार गुण्डों से लड़ कर भारतीय चौकी को पाकिस्तानी अंसार गुण्डों से मुक्त करा आर्य वीरों ने पाकिस्तानी ध्वज को छीन लिया। 1947 में भारत के आजाद होने के बाद भी जब फ्हैदराबादय् निजाम के शासन से मुक्त नहीं हुआ था और निजाम ने अपनी क्रूरता से जनता को आतंकित कर रखा था, उस समय आर्य वीर दल के आर्य वीरों ने अपनी जान पर खेल कर फ्हैदराबाद में ऊमरी नामक स्थान पर, एक बैंक में निजाम का पैसा जमा थाय् वहाँ से 30 लाख रुपये लूट कर, उस समय के भारत के पहले गृहमन्त्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को यह राशि सुर्पुद कर वीरोचित कार्य करने में सफलता प्राप्त की।

सन् 1942 ईस्वी में 400 आर्य वीरों का प्रथम शिविर बदरपुर, दिल्ली में सफलतापूर्वक लगाया गया। जिसमें सारे देश से चुने हुये आर्य वीरों को एक मास तक राष्ट्र रक्षा हेतु सघन प्रशिक्षण दिया गया।

देश पर आपदा आने पर आर्य वीर कहाँ पीछे रहने वाले थे, जैसे- 1936 में मध्य भारत में अकाल पड़ा, 1942-43 में बंगाल में अकाल, 1950 में असम की बाढ़, केकड़ी (राजस्थान), मोरवी (गुजरात) में भयंकर बाढ़, पंजाब की बाढ़ आदि में हजारों पीडि़तों की सेवा व राहत कार्य भी आर्य वीरों ने किये। हैदराबाद का सत्याग्रह हो या कहीं महामारी फैली हो, आर्य वीर दल हर कार्य में सदैव सर्वप्रथम उपस्थित रहा है।

जहाँ शस्त्र बल नहीं होते वहाँ शास्त्र पछताते व रोते हैं।

ऋषियों को भी सिद्धि मिलती तप से जब पहरे पर धनुर्धर राम खड़े होते हैं

विशेष कार्य (युद्ध काल)

वर्ष 1999 में हुये कारगिल युद्ध के समय रेलवे स्टेशनों पर एकत्र होकर प्रतिदिन सीमा पर भारत माता रक्षा के लिये जाने वाले सैनिकों के उत्साहवर्द्धन हेतु विशेष उत्सव आयोजित किये गये तथा कई स्थानों पर फ्ब्लड डोनेशन कैंपय् लगाकर सैकड़ों लीटर खून ब्लड बैंक को डोनेट सैनिकों हेतु किया गया।

आर्य वीर दल का संगठनात्मक स्वरूप

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दल का संचालन प्रधान संचालक सार्वदेशिक आर्य वीर दल के माध्यम से होता है। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के संचालन हेतु प्रधान संचालक- प्रान्तीय संचालकों की नियुक्ति करते हैं। प्रान्तीय संचालकों का दायित्व अपने-अपने राज्यों में आर्य वीर दल के उद्देश्यों के अनुसार कार्य करना होता है। उद्देश्यों की पूर्ति हेतु प्रान्तीय संचालक विभिन्न स्तरों पर सह संचालक, उप संचालक, मंडल संचालक, जिला संचालक, नगर नायक, ग्राम नायक, शाखा नायक, विभिन्न मन्त्री मण्डल आदि की नियुक्ति करता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक आर्य समाज फ्अधिष्ठाता आर्य वीर दलय् का निर्वाचन करती है। इसी प्रकार प्रान्त की आर्य प्रतिनिधि सभा भी अधिष्ठाता का निर्वाचन करती है। अधिष्ठाता फ्आर्य वीर दलय् व फ्आर्य समाजय् के बीच के सम्बन्धों को मजबूती प्रदान करने का कार्य करता है।

आर्य वीर दल की सदस्यता

आर्य वी दल के उद्देश्यों के प्रति आस्था रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति इसमें नियमानुसार प्रवेश लेकर महर्षि दयानन्द का कार्य कर सकता है। सदस्यों को निम्नलिखित आधार पर वर्गीकृत किया जाता है-

1- दीक्षित आर्य वीर – जिन्होंने आर्य वीर दल के प्रशिक्षण शिविर में यज्ञाग्नि के समक्ष दीक्षा लेकर आजीवन दल के अनुशासन में रहकर कार्य करने की प्रतिज्ञा की हो।

2- वृत्ति आर्य  वीर – जो प्रतिदिन आर्य वीर दल की शाखा में नियमपूर्वक सम्मिलित होता हो।

3- साधारण आर्य वीर – उपरोक्त के अन्य सभी सहयोगी, सज्जन आर्य वीर दल के साधारण सदस्य हैं।

फ्पत्थर सी हो मांसपेशियाँ, लोहे से भुजदंड अभय।

नस-नस में हो लहर आग की, तभी जवानी पाती जयत्र्य्

 

 

आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश की दैनिक गतिविधियाँ

वर्तमान में दिल्ली के अधिकांश प्रमुख स्थानों पर दल की दैनिक शाखायें संचालित हो रही हैं। जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों बालक/बालिकायें व युवक/युवतियाँ शारीरिक, आत्मिक, बौद्धिक एवं चारित्रिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। शारीरिक पाठ्यक्रम के अन्तर्गत सुयोग्य शिक्षकों एवं शाखा  नायकों द्वारा योगासन, कराटे, लाठी, नानचक, पी-टी-, सैनिक शिक्षा (परेड) आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। बौद्धिक पाठ्यक्रम के अन्तर्गत सुयोग्य विद्वानों द्वारा सन्ध्या, यज्ञ, खान-पान, व्यवहार, आचरण, स्वाध्याय आदि विषयों का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रत्येक रविवार को स्थानीय आर्य समाजों में आर्य वीरों को यज्ञ एवं सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक शिक्षा भी दी जाती है।

आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश द्वारा किये गये प्राकृति आपदा में राहत कार्यों का संक्षिप्त विवरण

1- उत्तरकाशी भूकम्प 1991- दिल्ली से राहत सामग्री एकत्रित कर आपदा क्षेत्र में दूर-दराज में रहने वाले आखिरी पीडि़तों तक मदद पहुँचाई।

2- लातूर भूकम्प 1993- पीडि़तों की सेवा एवं राहत सामग्री का समुचित वितरण।

3- चमोली भूकम्प 1994- प्रभावित गाँवों का निरीक्षण एवं उसी अनुसार पीडि़तों तक राहत सामग्री वितरण।

4- उड़ीसा चक्रवात 1999- मलवे में फंसे शवों का दाह संस्कार करके महामारी के खतरे को कम करना एवं सभा के साथ मिलकर तीन नये गाँवों का निर्माण करना और राहत सामग्री का वितरण करना।

5- गुजरात भूकम्प 2001- मलवों में दबे शवों को निकाल कर दाह संस्कार, सामग्री वितरण एवं स्वú डॉú साहिब सिंह वर्मा (पूर्व मुख्यमन्त्री, दिल्ली) के साथ मिलकर गाँव पीडि़तों के लिये नये घरों का निर्माण में सहयोग करना।

6- बिहार बाढ़ 2008- सभा के सहयोग से आर्य वीरों द्वारा राहत सामग्री वितरण व पीडि़तों की सेवा करना।

7- उत्तराखण्ड बाढ़ 2013- वर्षा एवं बाढ़ से प्रभावित आन्तरिक क्षेत्रें तक पहुँच कर सेवा कार्य एवं राहत सामग्री का व्यवस्थित रूप ये वितरण करना।

8- जम्मू-कश्मीर बाढ़ 2014- दिल्ली से राहत सामग्री एकत्र कर जम्मू के प्रभावित इलाकों में वितरण तथा आर्य प्रतिनिधि सभा जम्मू को राहत सामग्री वितरण के लिये सुपुर्द करना।

आर्य समाज से सम्बन्धित किसी भी संगठन द्वारा चलाये गये अब तक के सबसे बड़े संगठित राहत अभियानों में दिल्ली के आर्य वीरों द्वारा किये गये कार्यों का योगदान किसी गौरव गाथा से कम नहीं है। चाहे भूकम्प हो या तूफान, आर्य वीर दल के प्रशिक्षित आर्य वीर देश पर आने वाली हर एक विपत्ति का सामना करने को हर पल तैयार रहते हैं तथा इन राहत के कार्यों में सबसे पहले पहुँचने वाली राहत टोली आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश की होती है।

आर्य प्रतिनिधि सभाओं द्वारा आयोजित महासम्मेलनों में सेवा, सुरक्षा एवं व्यवस्था

समय-समय पर आयोजित सार्वदेशिक एवं प्रान्तीय सभाओं के आर्य महासम्मेलनों को सफल बनाने में विभिन्न व्यवस्थाओं (भोजन, सुरक्षा, सेवा) को कर आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश के अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं आर्य वीरों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वर्ष 1983 में आयोजित महर्षि दयानन्द सरस्वती निर्वाण शताब्दी, अजमेर (राजस्थान) में दिल्ली से 1000 युवकों का जत्था पहुँचा और वहाँ पर सम्मेलन की विभिन्न व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संभाला।

वर्ष 1997 में आयोजित आर्य महासम्मेलन, रामलीला मैदान दिल्ली में सेवा शिविर।

वर्ष 1998 में आर्य वीर दल के इतिहास में अब तक के वृहदतम अन्तर्राष्ट्रीय आर्य वीर महासम्मेलन, दिल्ली के आयोजन को सफल बनाने के लिये दिल्ली के आर्य वीरों ने महीनों तक कड़ा परिश्रम किया।

वर्ष 2001 में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन, मुम्बई में विशेष जिम्मेदारियाँ सौंपी गई, जिसे आर्य वीरों ने बखूबी निभाया।

वर्ष 2002 में गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार शताब्दी समारोह में भोजन व सुरक्षा व्यवस्था को सफलतापूर्वक सब संभाला।

वर्ष 2006 में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन, दिल्ली में आर्य वीरों ने मैदान सज्जा, सुरक्षा, स्वागत, पंजीकरण, आवास, परिवहन सहित लगभग सभी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दिया।

वर्ष 2008 में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन, मॉरीशस में दिल्ली के अधिकारियों द्वारा ध्वजारोहण की व्यवस्था को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराया।

वर्ष 2013 में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन, दिल्ली में आर्य वीरों ने सुरक्षा, ध्वजारोहण, परिवहन, आवास आदि लगभग सभी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दिया।

राष्ट्रीय शिविर व प्रान्तीय शिविरों का आयोजन

वर्ष 1991-92 में फ्हरि नगर, घंटाघर, दिल्लीय् में 500 से अधिक युवकों के राष्ट्रीय शिविर का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया।

वर्ष 1996 में फ्पालम, दिल्लीय् में 700 युवकों से अधिक आर्य वीरों के राष्ट्रीय शिविर का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया।

पिछले लगभग 30 वर्षों से निरन्तर आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश के माध्यम से सुयोग्य प्रशिक्षकों के निर्देशन में फ्आर्य वीर चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविरय् आयोजित कर रहा है। प्रत्येक वर्ष मई-जून माह में आयोजित होने वाले इन शिविरों में 200 से 350 युवकों को शारीरिक एवं बौद्धिक प्रशिक्षण देकर उन्हें राष्ट्र सेवा हेतु संकल्प कराकर दीक्षित किया जाता है।

शक्ति प्रदर्शन एवं जन-चेतना कार्य

वीर भोग्या वसुन्धराय्

समाज में उत्पन्न होने वाली विकृतियों के विरोध में प्रदर्शन के माध्यम से आम जनता को जागृत करने का कार्य करते रहे हैं। इन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य जनता एवं सरकार का ध्यान इन बुराइयों की ओर आकृष्ट कर उन्हें रोकने की दिशा में कदम उठाना होता है।

प्रदेश एवं शाखा के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रें में सफाई अभियान, पर्यावरण शुद्धि, साक्षरता अभियान, नशे एवं अश्लीलता के विरुद्ध अभियान, समाज सुधार का अभियान, पशु हत्या को रोकने का अभियान, पाखण्ड उन्मूलन का कार्य पूरी तन्मयता और ताकत के साथ किया जाता है।

प्रति वर्ष 25 दिसम्बर को निकलने वाली स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान दिवस शोभायात्र में आर्य वीर दल की समस्त शाखायें पूरे उत्साह से भाग लेती हैं। पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर व्यायाम आदि के माध्यम से शक्ति प्रदर्शन किया जाता है तथा अत्याधुनिक यन्त्रें की सहायता से शोभायात्र को नियन्त्रित किया जाता है।

महर्षि दयानन्द एवं सत्यार्थ प्रकाश के विषय में अभद्र भाषा व टिप्पणियाँ

करौथा के रामपाल द्वारा किया जाना

वर्ष 2006 में आचार्य बलदेव जी के नेतृत्व में आर्य समाज ने रामपाल के विरुद्ध प्रचण्ड विरोध व प्रदर्शन करने के कार्य में आर्य वीर सोनु व एक ब्रह्मचारी का बलिदान हुआ। जिसके तहत हरियाणा सरकार ने रामपाल के विरुद्ध एफ-आई-आर दर्ज कर कार्यवाही की।

पुनः वर्ष 12 मई 2013 को आचार्य बलदेव जी के नेतृत्व में आर्य समाज ने रामपाल के विरुद्ध प्रचण्ड विरोध व प्रदर्शन का कार्य किया। जिसमें आचार्य बलदेव जी पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने पर दिल्ली के पवन आर्य द्वारा उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया तथा आर्य वीर दल के पूर्व संचालक हंस जी के पोते दीपीकेश आर्य को पेट में गोली लगी, जिसको बाद में उपचार करके बचा लिया गया।

इन विरोध प्रदर्शनों के कारण आज रामपाल जेल में बंद है।

भ्रमण: रोमांचकारी यात्रयें

दिल्ली के आर्य वीर द्वारा वर्ष 2003 व 2014 में दुनिया की सबसे ऊँची सड़क फ्खरदुंगला पासय् लद्दाख पर फ्ओýम् ध्वजय् फहराया गया।

वर्ष 2005 व 2014 में दिल्ली से गुजरात (महर्षि दयानन्द जन्मस्थली, टंकारा) मोटर साईकल से प्रचार कार्य करते हुये यात्र की गई।

युवाओं का मनोबल बढ़ाने तथा प्रकृति की गोद में बैठकर उन्हें मानवीय मूल्यों एवं राष्ट्रहित चिन्तन करने हेतु प्रत्येक वर्ष भ्रमण शिविर का आयोजन किया जाता है। इन यात्रओं में भविष्य की योजनाओं को लेकर भी चर्चायें की जाती हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम से युवाओं को एक-दूसरे को समझने का मौका मिलता है।

खेल-कूद एवं भाषण प्रतियोगिता

युवाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिये प्रतिवर्ष खेल-कूद एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं के भीतर छूपी प्रतिभाओं को जानने एवं उन्हें विकसित करने का अवसर प्राप्त होता है।

बलिदानियों को श्रद्धांजलि

राष्ट्र रक्षा हेतु बलिदान हुये एक-एक जवान के बलिदान को आर्य वीर दल नमन करता है। इन जवानों की गौरव गाथा गाने तथा अपने हृदय सुमन अर्पित करने हेतु फ्एक शाम बलिदानियों के नामय् कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

आर्य वीर एकत्रिकरण एवं अधिकतम संख्या दिवस

वर्ष 2006, 2008, 2009, 2011 में समग्र शक्ति मूल्यांकन एवं प्रदर्शन हेतु आर्य वीर एकत्रिकरण का अयोजन किया जाता रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी युवाओं एवं उपस्थित लोगों को समाज हित हेतु कृत संकल्प होने के लिये शपथ ग्रहण कराई जाती है।

नियोजन, प्रबन्धन एवं प्रचार

वर्ष भर चलने वाले इन सभी कार्यक्रमों को सुचारू रूप से नियोजित एवं क्रियान्वित करने के लिये आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश का मुख्य कार्यालय- आर्य समाज, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, मिण्टो रोड, नई दिल्ली-110002 पर योजनाबद्ध रूप से कार्य कर रहा है। कार्यालय के माध्यम से दिल्ली की सम्पूर्ण शाखाओं के कार्यों को नियन्त्रित किया जाता है। वहीं दूसरी ओर शाखाओं के संचालन एवं निरन्तर विकार हेतु साहित्य, गणवेश, अस्त्र-शस्त्र (लाठी, भाला, नानचक), यज्ञ आदि की व्यवस्थायें की जाती हैं तथा पूरी दुनिया में आर्य वीर दल की गतिविधियों एवं विचारों को अवगत कराने हेतु आधिकारिक फेसबुक आई-डी- व वाट्सऐप आई-डी- आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश तथा वेबसाईट- ूूूण्ंतलंअममतकंसण्वतह का निर्माण किया गया है।

 

विशेष

आर्य वीर दल के अधिकारी जहाँ इस प्रकार के राष्ट्रहित के कार्यों में अपना अधिकतम समय देते हैं, वहीं इन विस्तृत कार्यक्रमों को चलाने के लिये दल के अधिकारी किसी भी प्रकार का परिवहन, दूरसंचार, भोजन एवं अन्य कार्यों पर व्यय हुये व्यक्तिगत धन को भी संगठन से नहीं लेते। दल के अधिकारियों का यह भाव संगठन के प्रति सच्ची आस्था और राष्ट्र उन्नति की भावना को प्रकट करता है।

सम्पर्कः-

मुख्य कार्यालय- आर्य समाज, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, मिण्टो रोड, नई दिल्ली-110002

जगबीर आर्य                  सुन्दर आर्य                          बृहस्पति आर्य                         जितेन्द्र भाटिया

9810264634           9899008054                       9990232164                         9811322155