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    Brihaspati Arya
  • Posted on:

    August 21st, 2017
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Arya

🕉 || वैदिक-दर्शन || 🕉 🌸🌸🌸🌸🌸 ओ३म् वसु चे मे वसतिश्च मे कर्म च मे शक्तिश्च मेऽर्थश्च मऽएमश्च मऽइत्या च मे गतिश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्॥ —यजुर्वेद १८|१५ 🌺🌺🌺 यज्ञ, पुरुषार्थ और प्रभु कृपा के द्वारा —- मेरी संम्पत्ति, मेरा घर, मेरा कार्य और कार्य करने की क्षमता, मेरा उद्देश्य, मेरा लक्ष्य और लक्ष्य को प्राप्त […]

🕉 || वैदिक-दर्शन || 🕉

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ओ३म् वसु चे मे वसतिश्च मे कर्म च मे शक्तिश्च मेऽर्थश्च मऽएमश्च मऽइत्या च मे गतिश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्॥
—यजुर्वेद १८|१५

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यज्ञ, पुरुषार्थ और प्रभु कृपा के द्वारा —- मेरी संम्पत्ति, मेरा घर, मेरा कार्य और कार्य करने की क्षमता, मेरा उद्देश्य, मेरा लक्ष्य और लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता और गति —- इन सब की लोक हित के लिए वृद्धि हो।

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By my yajna(sacrifice), noble deeds and grace of God — my assets, my house, my work and capacity to work, my objects, my aims, my way and speed to achieve the aim — all these grow auspiciously.

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🌼🌷सत्य ही शिव है 🌷🌼

आपका हर पल मंगलमय हो |

🙏🌹सस्नेह वंदन 🌹🙏